hirnoda.com की कहानी — 2017 से आज तक, एक दीया जो बुझने नहीं दिया

दिसंबर 2017 में शुरू हुई hirnoda.com लगभग 9 साल से लगातार चालू है। इससे किसी भी तरह की कोई कमाई नहीं होती — डोमेन-सर्वर का हर साल का ख़र्च शौक़ और कुछ नया सीखने, नया करने के लिए ख़ुद वहन किया गया। अब इसका दूसरा संस्करण तैयार है।

प्रकाशित: पढ़ने का समय: 6 मिनट
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दिसंबर 2017 में मैंने hirnoda.com शुरू की, ताकि इंटरनेट पर हमारे गाँव का भी अपना एक पता हो। कोई कहीं से भी Google पर “हिरनोदा” खोजे, तो उसे गाँव का इतिहास, मंदिर, सुविधाएँ, यहाँ हुए कार्यक्रम और यहाँ के लोगों की मेहनत दिखे। शुरुआत में इस काम में कन्हैया देवन्दा का साथ मिला।

उस समय मैं वेब डिज़ाइनिंग सीख रहा था। सीखने के लिए कुछ तो बनाना था — और मन में आया कि क्यों न अपने गाँव की वेबसाइट से शुरुआत करूँ। यही मेरा पहला काम था। न कोई कारोबारी सोच थी, न कोई कमाई का इरादा — बस एक रुचि थी कि गाँव के लिए कुछ अलग करूँ। वही रुचि इसे आज तक चलाती आ रही है।

वही सोच आज भी ज़िंदा है। यह पेज उसी सफ़र की कहानी है — बिना सजावट के, जैसी है वैसी।

एक नज़र में

शुरुआतदिसंबर 2017
कब से चालू2017 से आज तक, लगातार
हर साल का ख़र्चलगभग ₹4,000–5,000 (डोमेन, सर्वर और सुरक्षा)
अब तक कुल ख़र्चलगभग ₹40,000–50,000
इससे कमाईकोई नहीं — न विज्ञापन से, न शेयर करवाने से, न किसी फ़ीस से
अभी का रूपदूसरा संस्करण (अक्टूबर 2026)

सच कहूँ तो

इन सालों में एक सच्चाई भी देखी। गाँव में अनेक अच्छे काम हुए — खेल प्रतियोगिताएँ, प्रतिभा सम्मान, रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण, धार्मिक आयोजन। लेकिन बहुत कम बार ऐसा हुआ कि कोई ख़ुद आगे आकर कहे — “भाई, यह ख़बर और ये फोटो वेबसाइट पर डाल दो।” लोगों ने वेबसाइट देखी ज़रूर, पर ज़्यादातर ने इसे अपना नहीं समझा।

यह शिकायत नहीं है। हर किसी की अपनी व्यस्तता है, और गाँव में कोई भी नई चीज़ धीरे-धीरे ही अपनी जगह बनाती है। पर यह भी सच है कि कई बार मन में आया — जब किसी को ज़रूरत ही नहीं, तो हर साल यह ख़र्च क्यों? हर साल डोमेन और सर्वर के नवीनीकरण की तारीख़ आती, और हर बार यही सवाल सामने खड़ा हो जाता।

क्या इस वेबसाइट से कमाई होती है? — नहीं

कई लोगों के मन में यह बात आती है कि वेबसाइट बनाने या इसके पेज शेयर करवाने से शायद मेरी कोई कमाई होती होगी। साफ़ बता दूँ — ऐसा बिल्कुल नहीं है। इस वेबसाइट से किसी भी प्रकार की कोई कमाई नहीं होती। न इस पर पैसे वाले विज्ञापन चलते हैं, न किसी से फ़ीस ली जाती है, न पेज शेयर करने या देखने से किसी को पैसा मिलता है। पशु बाज़ार में विज्ञापन डालना, जन-निर्देशिका में नाम जोड़ना, समस्या दर्ज करना — सब कुछ हर ग्रामवासी के लिए हमेशा मुफ़्त है।

जब आप कोई पेज शेयर करते हैं, तो उसका फ़ायदा सिर्फ़ गाँव को होता है — जानकारी ज़्यादा लोगों तक पहुँचती है, और इंटरनेट पर हिरनोदा की पहचान मज़बूत होती है।

फिर भी बंद क्यों नहीं की

हर बार जवाब एक ही मिला — गाँव की यादें किसी एक साल की नहीं होतीं।

  • आज जो फोटो किसी के मोबाइल में पड़ी है, वह फ़ोन बदलते ही खो जाती है। वेबसाइट पर वही फोटो 20 साल बाद भी मिलेगी।
  • गाँव से बाहर — जयपुर, दिल्ली, मुंबई या विदेश में — बसे हिरनोदा के लोगों के लिए यह अपने गाँव से जुड़े रहने की एक खिड़की है।
  • 2020 की “सबसे लोकप्रिय कौन?” प्रतियोगिता में कुछ ही दिनों में लगभग 4,000 लोग इस वेबसाइट पर आए। उस दिन समझ आया कि लोग जुड़ना चाहते हैं — बस उन्हें एक वजह चाहिए।
  • आने वाली पीढ़ी से जब कोई पूछेगा “तुम्हारा गाँव कैसा था?”, तो उनके पास दिखाने के लिए कुछ होगा।

दीया छोटा ही सही, जब तक जलता है, अँधेरा जीत नहीं पाता।

सफ़र के पड़ाव

दिसंबर 2017hirnoda.com की शुरुआत — ग्राम विवरण, सुविधाएँ और कार्यक्रम
2017–2019प्रतिभा सम्मान, HPL क्रिकेट, वॉलीबॉल, रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण महारैली — सब कार्यक्रम में दर्ज
अप्रैल 2020“सबसे लोकप्रिय कौन?” ऑनलाइन प्रतियोगिता — लगभग 4,000 विज़िटर
2021–2025बिना रुके चालू — हर साल डोमेन-सर्वर का नवीनीकरण अपने ख़र्च से
अक्टूबर 2026दूसरा संस्करण — गाँव के रोज़ के काम आने वाला डिजिटल मंच

अब दूसरा संस्करण — सिर्फ़ जानकारी नहीं, गाँव का साथी

2026 में hirnoda.com को पूरी तरह नए सिरे से बनाया गया है। अब यह सिर्फ़ पढ़ने की वेबसाइट नहीं, बल्कि गाँव के हर घर के काम आने वाला मंच है:

यह सब भी, पहले की तरह, अपने समय और अपने ख़र्च से तैयार किया गया है।

एक आदमी दीया जला सकता है, रोशनी पूरा गाँव फैलाता है

एक वेबसाइट को एक व्यक्ति चालू रख सकता है, पर उसे ज़िंदा पूरा गाँव ही रख सकता है। गाँव का विकास सिर्फ़ सड़क, नाली और भवन से नहीं होता — गाँव की पहचान, उसकी यादें और उसकी आवाज़ सहेजना भी विकास है।

हिरनोदा के जो युवा मोबाइल चलाना जानते हैं, वे इस गाँव की सबसे बड़ी डिजिटल ताक़त हैं। आपकी खींची एक फोटो, आपकी लिखी दो लाइनें — आने वाले सालों में गाँव का इतिहास बनेंगी।

आप क्या कर सकते हैं — बस 5 मिनट में

मैं आपसे कोई पैसे नहीं माँग रहा। बस इतना-सा सहयोग करें कि इस वेबसाइट को जितना हो सके, उतना उपयोग में लें। गाँव के लिए इसमें कुछ नया जोड़ना हो, कोई सुझाव हो या कोई ग़लती दिखे — तो WhatsApp पर बताएँ।

आख़िर में

यह वेबसाइट मेरी नहीं, हिरनोदा की है। मैंने बस इतने साल इसका दीया जलाए रखा है। अब इसकी रोशनी को आगे बढ़ाना हम सबके हाथ में है।

आइए, हिरनोदा को सिर्फ़ नक्शे पर नहीं, इंटरनेट पर भी सबसे आगे रखें।

— तेजपाल भादू, हिरनोदा · WhatsApp: 9166228481

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

hirnoda.com किसने और कब शुरू की?

hirnoda.com दिसंबर 2017 में तेजपाल भादू ने वेब डिज़ाइनिंग सीखते समय अपने पहले काम के रूप में शुरू की थी; शुरुआत में कन्हैया देवन्दा का सहयोग मिला।

क्या इस वेबसाइट से कोई कमाई होती है?

नहीं। hirnoda.com से किसी भी प्रकार की कोई कमाई नहीं होती — न विज्ञापन से, न पेज शेयर करवाने से, न किसी फ़ीस से। इसकी सभी सुविधाएँ ग्रामवासियों के लिए मुफ़्त हैं।

वेबसाइट का ख़र्च कौन वहन करता है?

डोमेन, सर्वर और सुरक्षा का हर साल लगभग ₹4,000–5,000 का ख़र्च 2017 से तेजपाल भादू शौक़ और कुछ नया सीखने, नया करने के लिए ख़ुद वहन करते आए हैं; इसके लिए किसी से पैसे नहीं माँगे जाते।

गाँव के कार्यक्रम की ख़बर वेबसाइट पर कैसे डलवाएँ?

कार्यक्रम की 3-4 फोटो और छोटी-सी जानकारी WhatsApp नंबर 9166228481 पर भेजें, या "लेख लिखें" पेज से ख़ुद लिखकर भेजें।

क्या यह ग्राम पंचायत की सरकारी वेबसाइट है?

नहीं। यह हिरनोदा के लोगों की सामुदायिक वेबसाइट है, जिसे एक ग्रामवासी ने बिना किसी कमाई के, रुचि से शुरू किया और चलाया है।

यह पेज गाँव वालों तक पहुँचाएँ
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