बसंत देशवाल

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पढ़ाई व शोधICAR–IARI, नई दिल्ली

फसलों के छिपे दुश्मनों को पहचानने वाले कृषि वैज्ञानिक बनने की राह पर

गाँव
हिरनोदा, ज़िला जयपुर
अभी क्या कर रहे हैं
पीएचडी शोधार्थी
संस्थान / जगह
ICAR–IARI, नई दिल्ली
विषय / क्षेत्र
सूत्रकृमि विज्ञान (Nematology) — पौधों का स्वास्थ्य

गाँव से देश के बड़े कृषि संस्थान तक

हिरनोदा के बसंत देशवाल आज देश के सबसे प्रतिष्ठित कृषि संस्थानों में से एक — भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR–IARI), नई दिल्ली — में पीएचडी कर रहे हैं। यह वही संस्थान है जिसे लोग “पूसा संस्थान” के नाम से भी जानते हैं। गाँव के किसी युवा का यहाँ तक पहुँचना पूरे हिरनोदा के लिए गर्व की बात है।

बसंत जी सूत्रकृमि विज्ञान (Nematology) विभाग में शोध करते हैं। उनका काम सीधे किसानों से जुड़ा है — फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले उन छिपे हुए परजीवियों को पहचानना, जो आँख से दिखते तक नहीं।

सूत्रकृमि (नेमाटोड) मिट्टी में रहने वाले धागे जैसे बहुत छोटे जीव होते हैं। कुछ पौधों की जड़ों में गाँठ बना देते हैं, जिससे पौधा पानी और खाद ठीक से नहीं ले पाता।

ख़ास काम

  • फसल के छिपे दुश्मन की पहचाननई वैज्ञानिक तकनीकों से उन सूत्रकृमियों की सटीक पहचान, जो पौधों को अंदर ही अंदर कमज़ोर कर देते हैं।
  • अनार की फसल पर अध्ययनजोधपुर के बगीचों में अनार को नुकसान पहुँचाने वाले रूट-नॉट नेमाटोड (Meloidogyne incognita) की पहचान — पौधे की बनावट देखकर और DNA व PCR जाँच से — ताकि बचाव के सही उपाय मिल सकें।
  • दवा की जगह जैविक बचावरासायनिक दवाओं के बजाय पर्यावरण के अनुकूल जैविक उपाय (जैसे लाभदायक फफूंद और बायो-एजेंट), जिनसे पौधों की बीमारी घटे और शुरुआती बढ़वार अच्छी हो।

हिरनोदा के लिए इसका मतलब

हमारे गाँव में ज़्यादातर परिवार खेती से जुड़े हैं। कई बार फसल पीली पड़ जाती है, बढ़ती नहीं, और कारण समझ नहीं आता — कई बार इसकी वजह जड़ों में छिपे यही सूत्रकृमि होते हैं। ऐसा शोध किसानों को कम ख़र्च और कम दवा में बेहतर फसल की राह दिखाता है।

सबसे बड़ी बात — यह कहानी गाँव के हर बच्चे को बताती है कि गाँव से निकलकर भी देश के सबसे बड़े संस्थानों तक पहुँचा जा सकता है।

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